कम पैसों में पत्नी जैसा सुख देने वाली जगह!

पहले लड़किया सिर्फ खाना बनाया करती थी मगर आज कल जमाना बदल गया है. अब लड़कियों को नौकरी करने की छूट दे दी गई है इसलिए अब लड़किया नौकरी करने के साथ खाना बनती है याद रखिये आप लड़की है तो जीवन से खाना बनाना कभी ख़त्म नहीं हो सकता अगर आप का पति किसी जगह कुक या हलवाई हो तब भी नहीं क्युकी ये पति के दिल में घुसने का सबसे अच्छा तरीका है मगर अब सचेत हो जाइये आपके पति को दूसरी पत्नी मिल गई है. क्युकी आप की शौतन बाजार में उतर आयी है उसका नाम है दूसरी पत्नी यकींन ना हो तो इस रेस्टुरेंट को देखिये
 ये है सेकंड वाइफ रेस्टुरेंट इस नाम के रेस्टुरेंट तमाम शहरो में है बेंगलुरु,मुंबई,नोएडा,इलाहाबाद,आपके शहर में भी हो शायद यही नहीं इस रेस्टुरेंट का नाम सुनकर मेरे दिमाग का फ्यूज उड़ा हुआ है इसका ऐसा नाम इसलिए है क्युकी यहाँ घर जैसा खाना मिलेगा और चुकी खाना घर जैसा होगा ज़ाहिर है उसे पत्नी ने बनाया होगा लेकिन पत्नी तो घर पर है इसलिए ये दूसरी पत्नी है मै निशब्द हूँ इस क्रिएटिविटी पर क्युकी नाम रखने वाले ने या वाली ने ये सोच रखा है की हर घर में खाना पत्नी ही बनती है सिर्फ ये सोचना काफी नहीं है इनका पूरा भरोसा है की खाना बनाना सिर्फ पत्नी का ही काम है इसलिए रेस्टुरेंट को दूसरी पत्नी पुकारा जा सकता है पत्नी का रोल बड़ा ही लिमिटेड है की पत्नी और भी बहुत सी काम करती है बच्चो को पढ़ना नौकरी करना कई पत्नियाँ गाइका होती है कई लेखिकाएं होती है कुछ पत्निया फ़ौज में होती है कुछ टैक्सी चलती है कुछ क्लब में बाउंसर होती है कई पत्निया दुसरो के घर बर्तन मांजती है कई डॉक्टर होती है सबसे बड़ी बात ये है की पत्निया सिर्फ पत्निया नहीं होती वे औरते होती है और जरुरी नहीं की उन्हें हर बार उनके पति से ज़ोर के देखा जाये कमाल की बात ये है की जब उन्हें उनके पति से ज़ोर कर देखा जाता है परिवार में उनकी भूमिका खाना बनाने तक सीमीत रह जाती है चाहे वो कोई आर्टिस्ट हो या फौजी ये रेस्टुरेंट बड़े सहेजता से ये मान कर चल रहा है की यहाँ पुरुष ही खाने आएंगे  पुरुष ही बिल भरेंगे ऐसा नहीं की महिलाएं यहाँ खाने नहीं आती होंगी मगर जब इस रेस्टुरेंट का नाम रखा गया औरतो को कस्टमर की भूमिका से  बाहर रखा गया उनका काम खाना बनाना है खाना नहीं जरा  बैठ कर सोचिये आपकी माँ ने कब सिर्फ और सिर्फ अपने लिए कोई खाने की चीज़ बनाई क्युकी उन्हें कोई बयंजन बिसेस खाने की इच्छा थी खाना बनाने में कोई बुरीइ नहीं है दोस्तों बुराइ है इस सोच में की खाना बनाना सिर्फ औरतो का ही काम है और खाना खाना पुरुष का कमाल की बात ये है की ये उसी समाज का आईना है जिसमे आधे से ज्यादा औरते एनीमिया से पीड़ित है क्युकी वे अंत में बचा हुआ खाना खाकर जीबित है तब जब दही सलाद और दाल जैसी पोस्टिक चीजे घर के बच्चे और पुरुष खाकर ख़त्म कर चुके होते है कहते है मर्द के दिल का राश्ता उसके पेट से होकर जाता है माने उसको अच्छा अच्छा खिलाते रहो तो वो तुमसे प्यार करता रहेगा लेकिन औरत के दिल का राश्ता कहा से होकर जाता है किसी को नहीं पता वैसे पत्नी खाना बनाने के साथ साथ पति की सेक्स पार्टनर भी होती है मगर कभी वैश्यालयो को पति का दुशरा घर नहीं कहा जाता ऐसा तो नहीं है शादी शुदा मर्द वैश्यालयो में नहीं जाते मगर वैश्यालयो की बात हम नहीं करेंगे क्युकी वहा से पति के दिल का राश्ता नहीं मिलेगा. आपको ये खबर कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताये
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