मेडिकल साइंस कहता है की अब हम इंसान तकनीक के दम पर अपनी शरीर बदल सकेंगे।
दोस्तों मेडिकल साइंस आज हर दिन कुछ नया और बेहतर बनने की कोसिस कर रहा है. डॉक्टर्स आज आपके हाथ पाओ आँखे किडनी यहाँ तक की आपके दिल को भी किसी दूसरे यक्ति के शरीर में जोड़ सकते है पर क्या होगा अगर आपका सर काटकर किसी और के सरीर में ही लगा दिया जाये
चलिए कल्पना कीजिये की आपकी उम्र 60 साल की है और आपकी बॉडी में किसी लाइलाज बीमारी ने घर कर लिया है ऐसे में अगर आपका सर काटकर किसी दिमागी रूप से मृत जवान यक्ति के शरीर में ट्रांसप्लांट कर दिया जाये तो आपको एक नया शरीर मिल जायेगा और आप एक बार फिर से जवान हो जायेंगे आप कह सकते है की एक तरह से आपका दुबारा जन्म हुआ. दोस्तों ये कल्पना जितना रोमांचक है उतनी ही चुनौती पूर्ण भी है क्युकी इस तरह के ऑप्रेशन में ज़रा सी भी चूक हो जाये तो ब्रेन उस नई बॉडी को रीजेक्ट कर सकता है साथ ही इस ऑप्रेशनके दौरान स्पाइनल कोर्ड को जोड़ना भी बेहद मुश्किल काम है ये स्पाइनल कोड ही होती है जो हमारे दिमाग द्वारा भेजी गयी सभी सिगनल्स बॉडी तक पहुँचाती है इस ऑप्रेशन के दौरान अगर स्पाइनल कोड की कोसिकाये गलत तरीके से जुर जाएंगी तो इंसान ना अपनी बॉडी मूवमेंट को सही तरीके से कण्ट्रोल कर पायेगा और ना ही कुछ फील कर पायेगा। वैसे अभी तक इस प्रकार के किसी ऑप्रेशन को इंसानी शरीर पर तो नहीं आजमाया गया.लेकिन इतिहास में कुछ जानवरो पर जरूर ऐसे शोध किये जा चुके है
पहली बार 1969 में सोबियत वैज्ञानिक व्लादिमीर डेमिख़ोव ने कुत्तो पर इस प्रकार का एक्सपरिमेंट करके दिखाए व्लादिमीर एक छोटे कुत्ते का सर काटकर एक दूसरे कुत्ते के सर के साथ ज़ोर देते थे व्लादिमीर के द्वारा तैयार किये गए 2 सर वाले कुत्ते अपने दोनों मुँह से खाने पिने और भौकने में सक्षम थे लेकिन इसु रेजेक्शन के वजह से कुत्ते एक महीने से ज्यादा जीवित नहीं रह पाए
इसके बाद 1970 के दौरान अमेरिकन न्यौरो सर्जन रॉबर्ट जे. व्हाइट ने बंदरो के हेड ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया रॉबर्ट ने ऑपरेशन के द्वारा बन्दर का सर काट कर एक दूसरे बन्दर के बॉडी के साथ सफलता पूर्वक ज़ोर दिया इस ऑपरेशन के बाद वो बन्दर देखने सुनने और सूंघने जैसी क्रियाये अच्छी तरह से कर रहा था लेकिन स्पाइनल कोड का सही तरह से जुराब नहीं होने के कारन वो केवल 2 दिन तक ही जीवित रह पाया फिर भी अगर हम ऐसे सफल ऑपरेशन कहे तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा. क्युकी 1970 के समय में मेडिकल साइंस पैनल कोड को अच्छी तरह से जोड़ने में सक्षम नहीं था लेकिन आज मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है की अब ऐसा करना संभब है
ऐसा मानना है न्यूरोसर्जन सर्जिओ कैनवेरो इटली में रहनेवाले सर्जिओ कैनवेरो इस साल के दिसंबर महीने तक एक इंसान का हेड ट्रांसप्लांट करने वाले है इस ऑपरेशन में लगभग 65 करोड़ की लागत होगी और दर्जनों डॉक्टर की टीम मिलकर इसे अंजाम देंगी। आपको बता दे की जिस आदमी ने इस अपने ऊपर ये प्रयोग करने की इच्छा जाहिर की है
उनका नाम है वालेरी स्पीरिदोनोव रूस के रहने वाले 31 वर्षीय वालेरी स्पीरिदोनोव एक लाइलाज बीमारी से जुज रहे है ऐसे में अगर उनका हेड ट्रांसप्लांट किसी दिमागी रूप से मृत इंसान के शरीर पर सफलता पूर्वक हो जाता है तो ये उनके लिए एक नया जीवन होगा। दोस्तों मेडिकल साइंस के इस उपलब्धि पर आपके क्या विचार है हमें कमेंट करके जरूर बताये।
और भी ऐसी जालिए हमारे बेल्ल आइकॉन को जरूर दबाये।





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